!! जैसा कर्म करेंगे , वैसा ही फल मिलेगा !!

ये सच है कि हम जैसे कर्म करते है , हमे उसका वैसा ही फल मिलता है । हमारे द्वारा किए गये कर्म ही हमारे पाप और पुण्य तय करते है ।  हम अच्छे कर्म करते है तो हमे उसके अच्छे फल मिलते है , अगर हम बुरे कर्म करते है तो हमे उसके बुरे फल ही मिलते है । हमारे जीवन में जो भी परेशानीया आती है उनका सम्बंध कही ना कही हमारे कर्मो से होता है ।
कबीर जी का दोहा भी यही याद दिलाता है कि बुरे कर्मो का फल हमेशा बुरा ही होता है !! 
               
करता था सो क्यो किया , अब करि क्यो पछताय !!
      बोय पेड बबुल का , आम कहां से खाय  !!! 

नोट - कभी - कभी हम जान बूझकर गलत काम करते है तो कभी अनजाने में गलत काम कर जाते है । जिसके कारण हमे आगे चलकर परेशानी उठानी पडती है । और जब हम पर कोई परेशानी आती है तब हम पछताते है कि काश हमने ऐसा काम ना किया होता तो शायद हम मुश्किल में ना पडते !! 

  • दोस्तो अब हमे ये देखना है कि हम अपने जीवन रुपी थैले में कौन - कौन से फल इकठ्ठे कर रहे है ? अगर हमने अच्छे फल इकठ्ठे किए मतलब कि अगर हमने अच्छे कर्म किये है तो हम खुशी से अपनी जिंदगी गुजारेंगे । लेकिन हमने अपने थैले से सडे गले फल या घास फुस इकठ्ठा किए है तो हमारी जिंदगी मे कभी खुशी नही आ सकती । हम कभी सुख से चैन से नही रह सकते । हमेशा दुखी और परेशान ही रहेंगे । इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करे और दुसरो को भी अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करे ।  

 

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