नाम बदलकर गोंड राजा भूपाल शाही के योगदान को खत्म करने की कोशिश

भोपाल। भोपाल शहर को बसाने में राजा भूपाल शाही का बड़ा योगदान है। भोपाल नाम कोई अपभ्रंश नहीं बल्कि भूपाल शाही के नाम पर ही वर्तमान नाम प्रचलित है। लेकिन इस क्षेत्र से जुड़ी आदिवासी पहचान व संस्कृति को राजनीतिक हित के लिए एक-एक करके खत्म किया जा रहा है। शहर का नाम बदलकर भोजपाल करने के खिलाफ आदिवासी गोलबंद हो रहे हैं। आदिवासी समाज के संगठनों से लेकर इतिहासकारों तक ने बिना विचार-विमर्श के नाम बदल देने के एकतरफा निर्णय का विरोध किया है।
अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी, बहुजन यूथ स्टूडेंट फ्रंट सहित आदिवासी समाज के नेताओं ने इस कदम के विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। गौरतलब है,महापौर ने प्रशासन अकादमी में इंटरनेशनल कांफ्रेस एंड एक्सपो ऑन राजा भोज में बोलते हुए शहर का प्राचीन नाम भोजपाल होने व भोपाल नाम अपभ्रंश के तौर पर पड़ जाने की बात कहते हुए इसका नाम फिर से भोजपाल करने का बयान दिया था।दो-दो भोजसेतू हैं, एक सड़क भी नहीं कमलापति के नाम पर आदिवासी समाज का विरोध इस बात पर है कि बीच शहर में कमलापति का महल होने के बावजूद उनके नाम पर शहर में एक सड़क का नाम तक नहीं रखा गया। शहर में एक भोज सेतू होने के बावजूद कमलापति के महल के सामने नया पुल बनाया गया तो उसका नाम भी भोज सेतू रख दिया गया।
पहले भी हुए बदलाव... बैरागढ़ क्षेत्र पर पोर्ते समाज की पहचान थी। यहां की आदिवासी पहचान धीरे-धीरे खत्म कर दी गई। पहले बैरागढ़ फिर संत हिरदाराम नगर कर दिया। वहीं जगदीशपुरा में किले को काला गौंड ने बसाया, लेकिन बाद में उसे इस्लाम नगर कर दिया गया।
'भोपाल शहर को भूपाल शाही ने बसाया था, कमलापति महल के पास स्थित सातखंडा किला हो, या आज के इस्लाम नगर का किला, जो पहले जगदीशपुरा था, जिसे काला गौंड ने बनाया था। चारों ओर आदिवासी विरासत के सबूत बिखरे पड़े हैं, जिन्हें खत्म करने की लगातार कोशिश की जा रही है। भोपाल का नाम बदलना सारी आदिवासी विरासत को मिटाने की कोशिशों की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन आदिवासी पहचान को इतनी आसानी से मिटाया नहीं जा सकेगा। इसके खिलाफ हम आंदोलन करेंगे। -गुलजार सिंह मरकाम, राष्ट्रीय संयोजक, अखिल भारतीय गोंडवाना पार्टी
शहर का नाम बदलने की कोशिश आदिवासी पहचान को मिटाने की कोशिश है। सरकार यह सारे कदम इसलिए ही उठा रही है, क्योंकि इन्हें आदिवासी वोट बैंक नहीं नजर आते। हम इसी सप्ताह इस कोशिश के खिलाफ बड़ी बैठक कर रहे हैं, जिसमें आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। -आईएस मौर्य बहुजन यूथ स्टूडेंट फ्रंट
यह पूरा क्षेत्र इतने विस्तृत फलक पर फैला हुआ है कि यहां हजारों साल पहले से मानव सभ्यता के निशान मिलते हैं। शहर के विकास में परमार वंश से लेकर गोंड वंश तक का अपना-अपना योगदान रहा है। अनेकता में एकता ही शहर की पहचान है, अब तक जो भी बदलाव हुए उनमें तो कुछ नहीं किया जा सकता, लेकिन अब एेसा कोई भी कदम जल्दबाजी में नहीं उठाना चाहिए। मुद्दे से जुड़े विद्वानों, जानकारों के साथ चर्चा करके निर्णय लेना चाहिए, लेकिन जिन बैठकों में एेसे निर्णय लिए जाते हैं, वहां उस विषय से जुड़े लोगों की परंपरा ही यहां नजर नहीं आती है। -नारायण व्यास, इतिहासकार
यह पूरा क्षेत्र इतने विस्तृत फलक पर फैला हुआ है कि यहां हजारों साल पहले से मानव सभ्यता के निशान मिलते हैं। शहर के विकास में परमार वंश से लेकर गोंड वंश तक का अपना-अपना योगदान रहा है। अनेकता में एकता ही शहर की पहचान है, अब तक जो भी बदलाव हुए उनमें तो कुछ नहीं किया जा सकता, लेकिन अब एेसा कोई भी कदम जल्दबाजी में नहीं उठाना चाहिए। मुद्दे से जुड़े विद्वानों, जानकारों के साथ चर्चा करके निर्णय लेना चाहिए, लेकिन जिन बैठकों में एेसे निर्णय लिए जाते हैं, वहां उस विषय से जुड़े लोगों की परंपरा ही यहां नजर नहीं आती है। -नारायण व्यास, इतिहासकार

0 comments:

Post a Comment